Sunday, 20 October 2019, 12:49 PM

जीवन मंत्र

 'थुकदम’ पर शोध खोलेगा जीवन-मृत्यु का रहस्य 

Updated on 8 August, 2019, 6:00
गीता में कहा गया है कि शरीर तो एक पुतला मात्र है इसमें मौजूद आत्मा जीव है। यह जिस शरीर में होता है उस शरीर के गुण, कर्म और अपेक्षा के अनुरूप मृत्यु के बाद नया शरीर धारण कर लेता है। आत्मा न तो जन्म लेता है और न इसकी... आगे पढ़े

मन की शक्ति 

Updated on 7 August, 2019, 6:00
मन को जीवन का केंद्रबिंदु कहना असंभव नहीं है। मनुष्य की क्रियाओं, आचरणों का प्रारंभ मन से ही होता है। मन तरह-तरह के संकल्प, कल्पनाएं करता है। जिस ओर उसका रुझान हो जाता है उसी ओर मनुष्य की सारी गतिविधियां चल पड़ती है। जैसी कल्पना हो उसी के अनुरूप प्रयास-पुरुषार्थ... आगे पढ़े

 इस तरह रामचरित मानस बना धर्म शास्त्र 

Updated on 5 August, 2019, 6:00
करीब पांच सौ साल पहले तक कोई धर्म ग्रंथ हिंदी में नहीं था। सभी धर्म ग्रंथ संस्कृत में थे और चूंकि मध्य काल में शिक्षा दीक्षा का चलन काफी कम हो गया था, भक्ति भावना या धर्म श्रद्धा के लिए लोग संस्कृत विद्वानों की ओर ही ताकते थे। ऐसा कोई... आगे पढ़े

दूसरों के दुख से अपना दुख ज्यादा बेहतर

Updated on 4 August, 2019, 6:00
एक कहावत है 'राजा दुखी, प्रजा दुखी सुखिया का दुख दुना।' कहने का अर्थ यह है कि संसार में जिसे देखो वह अपने को दुखी ही कहेगा। राजा का अपना दुख है, प्रजा का अपना और जिसे आप सुखी माने बैठें हैं उससे पूछ कर देंखेंगे तो वह भी अपने... आगे पढ़े

व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया 

Updated on 3 August, 2019, 6:00
बदलाव का प्रम निरंतर चलता है।जैन दर्शन इस प्रम को पर्याय-परिवर्तन के रूप में स्वीकार करता है। पर्याय का अर्थ है अवस्था।प्रत्येक वस्तु की अवस्था प्रतिक्षण बदलती है।यह जगत की स्वाभाविक प्रक्रिया है। कुछ अवस्थाओं को प्रयत्नपूर्वक भी बदला जाता है।स्वभाव से हो या प्रयोग से, बदलाव की प्रक्रिया को... आगे पढ़े

दोनों प्रकार का धन एक साथ नहीं मिल सकता  

Updated on 1 August, 2019, 6:00
संसार में दो प्रकार का धन होता है भौतिक धन और दूसरा आध्यात्मिक धन। मनुष्य का स्वभाव है कि वह ज्यादा से ज्यादा धन कमाने की चाहत रखता है। कोई व्यक्ति सोना, चांदी, रूपये पैसे का अंबार लगाकर धनवान कहलाता है तो कोई भूखा, प्यासा रहकर भी धनवान कहलता है।... आगे पढ़े

 साधना और सुविधा

Updated on 31 July, 2019, 6:00
आसक्ति के पथ पर आगे बढ़ने वाले अपनी आकांक्षाओं को विस्तार देते हैं। उनकी इच्छाओं का इतना विस्तार हो जाता है, जहां से लौटना संभव नहीं है। उस विस्तार में व्यक्ति का अस्तित्व विलीन हो जाता है। फिर वह अपने लिए नहीं जीता। उसके जीवन का आधार पदार्थ बन जाता... आगे पढ़े

कर्म के पाप-पुण्य में फंस जाता है जीव

Updated on 30 July, 2019, 6:00
ईश्वर क्षेत्रज्ञ या चेतन है, जैसा कि जीव भी है, लेकिन जीव केवल अपने शरीर के प्रति सचेत रहता है, जबकि भगवान समस्त शरीरों के प्रति सचेत रहते हैं। चूंकि वे प्रत्येक जीव के हृदय में वास करने वाले हैं, अतएव वे जीवविशेष की मानसिक गतिशीलता से परिचित रहते हैं।... आगे पढ़े

सुख की उपेक्षा क्यों?

Updated on 29 July, 2019, 6:00
मेरे पास लोग आते हैं। जब वे अपने दुख की कथा रोने लगते हैं, तो बड़े प्रसन्न मालूम होते हैं। उनकी आंखों में चमक मालूम होती है। जैसे कोई बड़ा गीत गा रहे हों! अपने घाव खोलते हैं, लेकिन लगता है जैसे कमल के फूल ले आए हैं। सुख की... आगे पढ़े

 सुख के स्वभाव में डूबो 

Updated on 28 July, 2019, 6:00
लगता है, आदमी दुख का खोजी है। दुख को छोड़ता नहीं, दुख को पकड़ता है। दुख को बचाता है। दुख को संवारता है; तिजोरी में संभालकर रखता है।   दुख का बीज हाथ पड़ जाए, हीरे की तरह संभालता है। लाख दुख पाए, पर फेंकने की तैयारी नहीं दिखाता। जो लोग... आगे पढ़े

 इच्छाओं को समर्पित करते जाओ  

Updated on 27 July, 2019, 6:00
सभी इच्छाएं खुशी के लिए होती हैं। इच्छाओं का लक्ष्य ही यही है। िंकतु इच्छा आपको कितनी बार लक्ष्य तक पहुंचाती है? इच्छा तुम्हें आनंद की ओर ले जाने का आभास देती है, वास्तव में वह ऐसा कर ही नहीं सकती। इसीलिए इसे माया कहते हैं। इच्छा वैâसे पैदा होती... आगे पढ़े

सम्यक दृष्टिकोण की जरूरत  

Updated on 26 July, 2019, 6:00
आज मानवता को बचाने से अधिक कोई करणीय काम प्रतीत नहीं होता। मनुष्य औद्योगिक और यांत्रिक विकास कर पाए या नहीं, इनसे मानवता की कोई क्षति नहीं होने वाली है, िंकतु उसमें मानवीय गुणों का विकास नहीं होता है तो कुछ भी नहीं होता है। एक मानवता बचेगी तो सब... आगे पढ़े

इस तरह रामचरित मानस बना धर्म शास्त्र  

Updated on 25 July, 2019, 6:00
करीब पांच सौ साल पहले तक कोई धर्म ग्रंथ हिदीं में नहीं था। सभी धर्म ग्रंथ संस्कृत में थे और चूंकि मध्य काल में शिक्षा दीक्षा का चलन काफी कम हो गया था, भक्ति भावना या धर्म श्रद्धा के लिए लोग संस्कृत विद्वानों की ओर ही ताकते थे। ऐसा कोई... आगे पढ़े

दूसरों के दुख से अपना दुख ज्यादा बेहतर  

Updated on 24 July, 2019, 6:00
एक कहावत है 'राजा दुखी, प्रजा दुखी सुखिया का दुख दुना।' कहने का अर्थ यह है कि संसार में जिसे देखो वह अपने को दुखी ही कहेगा। राजा का अपना दुख है, प्रजा का अपना और जिसे आप सुखी माने बैठें हैं उससे पूछ कर देंखेंगे तो वह भी अपने... आगे पढ़े

संघर्ष का सौंदर्य

Updated on 23 July, 2019, 6:00
एक बार की बात है कि मिट्टी ने मटके से सवाल जवाब करते हुए कहा, ‘मैं भी मिट्टी तू भी मिट्टी, परंतु पानी मुझे बहा ले जाता है और तुम पानी को अपने में समा लेते हो। वह तुम्हें गला भी नहीं पाता, ऐसा क्यों?’ मिट्टी के सवाल पर मटका... आगे पढ़े

खुद को कर्ता समझ अहंम न पालें 

Updated on 22 July, 2019, 6:00
एक बार हनुमानजी ने प्रभु श्रीराम से कहा कि अशोक वाटिका में जिस समय रावण क्रोध में भरकर तलवार लेकर सीता माँ को मारने के लिए दौड़ा, तब मुझे लगा कि इसकी तलवार छीन कर इसका सिर काट लेना चाहिये, किन्तु अगले ही क्षण मैंने देखा कि मंदोदरी ने रावण... आगे पढ़े

शुद्ध मन में आते हैं सद्विचार

Updated on 21 July, 2019, 6:00
मानव जीवन में विचार का विशेष महत्व है। विचार ही इंसान को अच्छा या बुरे कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। ऐसे में मन से खराब और दूषित विचारों को रोकने और निकाल फेंकने के लिए यदि थोड़ी कठिनाई हो तो भी सह लेनी चाहिए। वैसे भी यदि सच्चे... आगे पढ़े

परिवर्तनशील संसार का शाश्वत सुख 

Updated on 20 July, 2019, 6:00
मनुष्य जीवन अद्भुत है। इस जीवन के रहते जहां कुछ एक-दूसरे से प्यार करते हैं, वहीं कुछ नफरत करते हुए दिखते हैं। यहां तक कि इंसान, इंसान से भाग रहा है। आज का मानव हर दौड़ में आगे निकल जाने का प्रयास करता रहता है। पर यह दौड़ कब तक?... आगे पढ़े

सहनशीलता में सम्मान 

Updated on 18 July, 2019, 6:00
कहते हैं कि महान से महान व्यक्ति की भी अंतिम समय में भी यदि कोई इच्छा होती है तो वो सिर्फ और सिर्फ और महान बनने की ही होती है। मतलब सम्मान प्राप्त करना किसे अच्छा नहीं लगता है, ऐसे में जरुरी हो जाता है कि सम्मान प्राप्त करने के... आगे पढ़े

नासमझ रोता है भाग्य का रोना

Updated on 17 July, 2019, 6:00
धर्म कोई भी हो, लेकिन आस्थावान को अपने भाग्य पर उतना ही भरोसा होता है जितना कि जीवन और मरण में। वैसे भी मानव समाज में भाग्य को वो स्थान प्राप्त है जो कि किसी अन्य को हो नहीं सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अथक प्रयासों के बावजूद जो... आगे पढ़े

सदमार्ग पर चलें खुशियां मिलेंगी

Updated on 16 July, 2019, 6:00
प्रत्येक धर्म शास्त्र मानव को शिक्षा देते हैं कि किसी और की उन्नति, वैभव या संपन्नता को देखकर ईर्ष्या मत करो। यह नसीहत इसलिए दी जाती है क्योंकि आपकी ईर्ष्या से दूसरों पर तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, मगर आपका स्वभाव जरूर ईर्ष्यालु होकर बिगड़ जाएगा। किसी दूसरे की समृद्धि... आगे पढ़े

भगवान का स्मरण 

Updated on 15 July, 2019, 6:00
जहाँ भगवान का स्मरण चिन्तन होता है वह स्थान पवित्र माना जाता है। वहाँ के कण-कण में उस परमात्म-तत्त्व के परमाणु फैले रहते हैं। जो आदमी क्रोधी होता है उसके आसपास सात फीट के दायरे में क्रोध के परमाणु फैले रहते हैं। हर इन्सान एक पावर हाउस है। उसमें से... आगे पढ़े

खुश होने का दिखावा करने में ज्यादा खर्च होती है जीवन की ऊर्जा

Updated on 14 July, 2019, 6:00
आज की दौड़भाग भरी जिंदगी में कई लोग अंदर से दुखी हैं लेकिन बाहर से खुद को खुश दिखाने की कोशिश करते हैं। ये ही लोग दिखावा करने के अलावा खुद को जबरदस्ती खुश रखने की भी कोशिश करते हैं, लेकिन सदगुरू जग्गी वासुदेव के अनुसार इस तरह से बनावटी... आगे पढ़े

प्रेम में सीखें जीवन जीना

Updated on 13 July, 2019, 6:00
जीवन में प्रेम का साक्षात्कार महत्वाकांक्षा जीवन को ज्वरग्रस्त करने का मार्ग है। फिर क्या और कोई रास्ता नहीं हो सकता? रास्ता है। वह रास्ता है प्रेम का, महत्वाकांक्षा का नहीं। संगीत से प्रेम सिखाएं, दूसरे संगीत सीखने वाले से प्रतिस्पर्धा नहीं। गणित से प्रेम सिखाएं, दूसरे गणित के विद्यार्थी... आगे पढ़े

मूर्ति रुप में श्रीहरि

Updated on 12 July, 2019, 6:00
पुंडलिक भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था और श्रीहरि के दर्शनों की ईच्छा रखता था। इसके लिए वह हर तरह के जतन पूजा-पाठ, जप-तप और यज्ञ- अनुष्ठान करता रहता था। पुंडलिक की भक्ति से प्रसन्न होकर एक बार भगवान विष्णु उसके घर पर उसको दर्शन देने के लिए पहुंचे। उस... आगे पढ़े

आपकी सोच पर निर्भर है कर्म 

Updated on 11 July, 2019, 0:00
दो मित्र अक्सर एक वेश्या के पास जाया करते थे। एक शाम जब वे वहां जा रहे थे, रास्ते में किसी संत का आध्यात्मिक प्रवचन चल रहा था। एक मित्र ने कहा कि वह प्रवचन सुनना पसंद करेगा। उसने उस रोज वेश्या के यहां नहीं जाने का फैसला किया। दूसरा... आगे पढ़े

गरीब होने का अहसास 

Updated on 10 July, 2019, 6:00
पुराने जमाने की बात है तीनों लोकों के धन देवता कुबेर ने एक दिन सोचा कि मेरे पास इतनी संपत्ति है क्यों न उसका प्रदर्शन किया जाए। यह विचार कर उन्होंने एक भव्य भोज का आयोजन किया। तीनों लोकों के समस्त देवताओं को उन्होंने आमंत्रित किया। भगवान शिव उनके इष्ट... आगे पढ़े

अशांति का कारण होती हैं कामनाएं 

Updated on 9 July, 2019, 6:00
वर्तमान समय में अधिकांश मनुष्य विचारों के नाकारात्मक प्रभाव के वशिभूत है। यही वजह है कि संपूर्ण विश्व कहीं न कहीं युद्ध के कगार पर खड़ा नजर आ रहा है। भारतीय ही नहीं दुनिया के  नेताओं और धार्मिक शक्तियों के विचारों में सामंजस्यता नजर नहीं आ रही है।  वर्तमान समाज... आगे पढ़े

मौत का जश्न 

Updated on 8 July, 2019, 6:00
एक राजा थे जो अपने मंत्री के ज्ञान व उनकी चेतना से कुपित थे। एक बार मंत्री के जन्मदिन समारोह के दौरान जब सब खुशिंयां मना रहे थे तभी सैनिक राजा का संदेश लेकर पहुंचे और बोले कि आज शाम को मंत्री को फांसी दी जाएगी। यह सुनकर समारोह में... आगे पढ़े

अन्न के कण और आनंद के क्षण

Updated on 7 July, 2019, 6:00
महाकवि कालिदास रास्ते में थे। प्यास लगी। वहां एक पनिहारिन पानी भर रही थी। कालिदास बोले : माते! पानी पिला दीजिए बड़ा पुण्य होगा। पनिहारिन बोली : बेटा, मैं तुम्हें जानती नहीं। अपना परिचय दो। मैं पानी पिला दूंगी।  कालिदास ने कहा : मैं मेहमान हूं, कृपया पानी पिला दें।... आगे पढ़े

मूवी रिव्यू

राशिफल