मानसूनजनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ा


भोपाल । बारिश के चलते इस बार आंखों की बीमारी यानि कंजेक्टिव वाइटिस ने पूरे शहर में आतंक मचा रखा है। कई शहरों से भोपाल होकर आई इस बीमारी ने मरीजों का तांता लगा दिया है। हमीदिया में हर दिन जहां सैकड़ों मरीज पहुंच रहे हैं, वहीं निजी अस्पतालों और डाक्टरों के क्लिनिक पर भी मरीजों की भरमार है। सामान्य तौर पर तीन से चार दिन तक आंखों में खटकने वाली यह बीमारी एक व्यक्ति से शुरू होकर पूरे परिवार को निशाना बना रही है।कुछ लोगों का मानना है कि कंजेक्टिव वाइटिस भोपाल से ही शुरू हुआ, जबकि डाक्टरों का मानना है कि यह बाहर से आई हुई बीमारी है। आंख आने की इस बीमारी में जहां आंखे बुरी तरह लाल हो जाती हैं, वहीं आंखों में कंकर खटकने जैसी स्थिति से मरीज परेशान रहते हैं। आम तौर पर यह बीमारी तीन से चार दिन में ठीक होती है, लेकिन लापरवाही के चलते पूरे परिवार को निशाना बना लेती है। इस बीमारी का वैसे तो कोई इलाज नहीं है, लेकिन आई ड्राप के जरिए कुछ राहत पाने की कोशिश चलती रहती है। 

पांच में से चार दवाइयां नहीं कर रही असर
आमतौर पर फंगल इन्फेंक्शन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाइयां भी अब कारगर साबित नहीं हो रही है। डाक्टर खरे के अनुसार दवाइयों का इस्तेमाल बीच में ही छोड़ देने के कारण इन दवाइयों के प्रति इन्फेक्शन की प्रतिरोधकता निर्मित हो गई है। इसके कारण कई दवाइयां अब कारगर साबित नहीं हो रही हैं। हालांकि कई नई दवाइयां मार्केट में उपलब्ध हैं, लेकिन इनकी कीमत अधिक होने के कारण आमजन की पहुंच से दूर है। स्किन रोग विशेषज्ञ डा. सुकेन दशोरे के अनुसार पांच में से चार दवाइयों में रेजिस्टेंस पैदा कर लिया है और अब एक ही दवाई है, जिसके कारण स्कीम ट्रीटमेंट किया जा रहा है।

देखने से नहीं आंखों पर हाथ लगाने से होती है बीमारी
इन्फेक्टेड आंखों को देखने से नहीं, यह बीमारी आंखों से निकल रहे पानी के संपर्क में आने से होती हैं। सबसे ज्यादा इन्फेक्शन बच्चों में तेजी से फैल रहा है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप गोयल के अनुसार कांटेक्ट लैंस ना लगाएं, मेकअप ना लगाएं, अच्छी डाइट रखें। 8 दिन के अंदर बिना दवाइयों के भी कंजेक्टि वाइटिस अपने आप ही ठीक हो जाता है, लेकिन अन्य संक्रमण से बचाव के लिए आई ड्राप का इस्तेमाल आवश्यक हो जाता है।

चर्म रोग भी बढ़ा... त्वचा में जहां नमी वहां बढ़ जाते हैं रोग
आमतौर पर मानसून के दौरान फंगल पैदा करने वाले जीवाणु कई गुना तेजी से फैलते हैं। वर्षा के मौसम के चलते शरीर पर चट्ठे, इन्फेक्शन, चमड़ी से जुडी बीमारियों के साथ-साथ फंगल इन्फेक्शन तेजी से फैल रहा है। पैर की अंगुलियों के बीच, कमर के निचले हिस्से, बालों और त्वचा के वह हिस्से जहां नमी बनी रहती है, वहां यह इन्फेक्शन तेजी से फैल रहा है। बारिश में गीले होने और कपड़े नहीं बदलने के कारण यह संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है।